रिठाल गाँव जिला रोहतक के विशाल गाँवो मे से एक है, जिसकी आबादी 15000 से अधिक है। यहाँ पर दो ग्राम पचायते हैं जिनके नाम हैं- 1. रिठाल फोगाट एवं 2. रिठाल नरवाल।
रिठाल गाँव की स्थापना 13वीं सदी मे हुई थी। गाँव के वास्तविक संसथापक राठुजी नामक व्यक्ति राजपूत वंश के थे बाद मे जिनके नाम पर गाँव का नाम भी रिठाल रखा गया। रिठाल मे बसने वाले लोग विभिन्न जातियों से सम्बन्धित हैं। रिठाल गाँव अपने शान्तिपूर्ण वातावरण और संसाधनो के कारण पूरे क्षेत्र मे प्रसिद्ध है। गाँव के सभी के लोग सहायक और सीधे-सादे चरित्र के हैं।
गाँव रिठाल जिला रोहतक(हरियाणा) के समीप स्थित है। गाँव का सयुंकत कृषि जिसमे प्रमुख फसलें गेहुँ, चावल, गन्ना एवं बाजरा हैं में अपना एक इतिहास है। गाँव के लोग बडे धार्मिक हैं तथा सभी पवित्र अवसरों मे भाग लेते हैं।
रिठाल की खरीफ की प्रमुख फसले चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास तथा गन्ना हैं। इन फसलों के लिए खेतों को अप्रैल मई मे तैयार किया जाता है तथा बीज की बुआई जून मे बारिश के मौसम मे की जाती है। फसल नवम्बर के शुरु होने तक कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
रबी की प्रमुख फसलें गेहूँ औऱ सरसों हैं। मैदान की तैयारी अक्तूबर के अंत् या नवम्बर के शुरु होने पर की जाती है तथा कटाई मार्च मे की जाती है। यहाँ पर नहरे कृषि की जीवन रेखा है।गाँव की प्रमुख नहर पश्चिमी यमुना नहर है। यह यमुना से ताजेवाला मे शुरु होती है।
गाँव के लोग विभिन्न क्षेत्रों जैसे पुलिस बल (Police Force), अन्य सुरक्षा बल, सेना, आई. टी (I.T.), प्रबंधन (Management), अध्यापन औऱ अन्य सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों मे सफलता प्राप्त की है। इस गाँव का शिक्षा स्तर भी बेहतर है, यहाँ पर बहुत से छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण कर रह
जमदगनी के दो पुत्र हुए हैं, बडे पुत्र का नाम परशुराम तथा छोटे पुत्र का नाम वशिष्ट था जो बाद मे चल कर वशिष्ट मुनि के नाम से विख्यात हुए।
वशिष्ट मुनि से एक व एक परशुराम से संतान उत्पन्न हुई, क्रमश: प्रमार व चौहान ।
वशिष्ट मुनि के नाम से प्रमार वंश का गौत्र वशिष्ट कहलाया।
प्रमार वंश की 18 खाप हैं
सोढा प्रमार, सांकला, बैसक, ठाकर, ढोढ, उमठ, उमरा, सुमरा, खोटा पंवार, बिलहार, बहीबल, केवा, खिचडा, सुगडा, पुसैया, राया, महपावत, सुरेठा ।
पंवार गौत्र की कुलदेवी हरसुदी हैं। गौत्र वशिष्ट,शासन-पंवार, वर्ण-क्षत्रिय, नक महपावत वंश-चन्द्रमा, झाडी—नीम, निकास—आभु पर्वत से मोपात नगर यहाँ से उज्जैन फिर धारा नगरी आगे दिल्ली मे 20 साल रहे, और बाद मे कलानौर आ गए,
कलानौर 1202 मे राव राठा ने बसाया था उनके 10 पुत्र थे। उदे सिंह, धामाजी, कशुपाल, भाम्बे जी, शाह जी, तिताजी, गोगाजी, हांशा जी, राणा बनीपाल
देवपाल।
देवपाल के बेटे --- आचर जी, हनुमत सिह, धीर सिह, विदाजी, बाघ सिंह, धोलु जी, राठु जी, पातु जी, राहड जी, गिला जी,मालाजी।
राठु जी ने आकर 1535 विक्रमी समवत् मे रिठाल बसाा।